चार साल से अनुपस्थित बच्चों के घर पहुंच रहे शिक्षक, पालकों को समझा रहे शिक्षा का महत्व


शिक्षा गुणवत्ता अभियान के तहत नेऊरगांव खुर्द में पहल; ग्रामीणों की भागीदारी से बढ़ी बच्चों की स्कूल में नियमित उपस्थिति
शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला नेऊरगांव खुर्द में शिक्षा गुणवत्ता अभियान के तहत बुधवार को अनुपस्थित विद्यार्थियों के पालकों से संपर्क किया गया। शिक्षकों ने विद्यार्थियों के घर पहुंचकर उनके माता-पिता और पालकों से मुलाकात की तथा बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान पालकों को बच्चों की शिक्षा के महत्व और नियमित विद्यालय आने से होने वाले लाभों की जानकारी दी गई।
पालक संपर्क अभियान में शिक्षक आर.सी. वर्मा और रियाजुद्दीन कादरी के साथ ग्रामीणजन भी शामिल हुए। टीम ने अनुपस्थित विद्यार्थियों के पालकों से चर्चा कर बच्चों की स्कूल से दूरी के कारणों को समझने का प्रयास किया। साथ ही पालकों से कहा गया कि बच्चों की पढ़ाई में नियमितता बनाए रखना उनके भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।
शिक्षक रियाजुद्दीन कादरी पिछले करीब चार वर्षों से शाला प्रबंधन समिति (एसएमसी) के सदस्यों, प्रधान पाठक और संस्था के अन्य शिक्षकों के साथ मिलकर अनुपस्थित विद्यार्थियों के पालकों से संपर्क कर रहे हैं। उनका उद्देश्य बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय लाना और पालकों में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
लगातार किए जा रहे इन प्रयासों से विद्यार्थियों और पालकों में शिक्षा के प्रति रुचि बढ़ने की बात सामने आई है। शिक्षक और ग्रामीण मिलकर ऐसे बच्चों के परिवारों तक पहुंच रहे हैं, जो किसी कारण से नियमित रूप से विद्यालय नहीं आ पा रहे हैं।
शिक्षकों का कहना है कि केवल स्कूल में पढ़ाई कराने से ही शिक्षा का उद्देश्य पूरा नहीं होता। बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने में पालकों और समुदाय की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से पालक संपर्क अभियान को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है।